Find Peace Within Rather Than Outside

Peace

by Jayaram V

Have ever gone in search of peace? Do you look for peace outside of yourself? If so where can you find peace in a world that is unstable and impermanent. This essay, which is available in both Hindu and English, contemplates upon this aspect and where one can look for peace.


Have you ever gone out in search of peace (Shanti)? I am not referring to a woman or a maiden but to your inner state of mind.

People frequently go out in search of peace, but they do not find peace because peace is neither a substance nor an object, which can be searched or found in the outside world. Peace is an internal condition of the mind over which you have the birth right.

Have you ever seen any such place where peace will be available for an indefinite period? If there is any such place, people will surely go there and try to do business with it.

It is worth noting that when people cannot sell peace, they still try to do business with it in the name of peace. They use various tricks and means to offer you dreams of peace and try to sell it. This is the way of the world.

To find peace, where people do not go for vacations! In search of it, they go or plan to go to many places such as London, New York, Switzerland, Kulu Manali, and so on. They intend to stay there for a few days and try to find peace or happiness.

Do you think that by such means they will experience peace? They may find a brief relief from stress or anxiety, but not peace. With those solutions, they may temporarily escape from the problems of life. Surely, they do not experience peace but the illusion of it. I am not suggesting here that you should not go on vacations at all. Please do go, not to find peace, but to enjoy a few days of comfort and happiness or have a good time.

Peace is not found by searching for it or by going to places in search of it. You will have peace when you become inwardly peaceful and mentally stable. When you are peaceful, then you will find peace. In this, there is no doubt.

If you have peace in you, you will have peace outside. In this, the influence of the place is less and the influence of your internal state is more.

Do not try to find peace outside because it does not exist outside. It exists in you. Try to become internally peaceful. Wakeup your natural peaceful state and become established in it. This is the simple and the surest way to find peace in yourself.

Then, wherever you go, whatever you do, even if like Arjuna you are engaged in a battle, you will succeed in remaining peaceful and having peace in you,

This is the truth about peace.

Peace is not found in the external objects or places. It is neither an object nor a commodity, which you can purchase.

Peace is your eternal, infinite, true and essential state. It remains hidden deep within you, which no power in the world can destroy. When the day ends and the night wakes up, lift your head and look up. There, in every nook and corner of the night sky, you will see traces of eternal peace because space is the form of god, where the din of the world does not reach.

The essential state of that external space is also in the space within you, which you tend forget in search of material things or in the delusion of your egoism. In the pursuit of worldly life, you either suppress it or forget it.

It is why you do not experience peace in the night and do not escape from restlessness in the day.

If you bring your mind under control and if you purify your mind with the sharpness of your intelligence, then peace will manifest on its own, smile at you and radiate the truths of your life in the wisdom of your mind.

This is my confirmed opinion.

Hindi Translation

लेखक: जयराम वि

क्या आपने कभी शान्ति की खोज में निकले हो? मै कोई स्त्री या कन्या के बारे में नहीं बोल रहा हू, मगर आपके अपने अन्दर की मानसिक स्थिति के बारे में |

लोग शान्ति की खोज में अक्सर निकल पड़ते हैं, मगर उनको शान्ति नहीं मिलती क्योकि शान्ति कोई खोजनेवाली चीज या वसतु नहीं है| शान्ति एक मानसिक सथिथि है जिसके उपर आपका जनमसिध अधिकार है |

क्या आपने दुनिया में कोई वैसे जगह देखे हैं जहा शान्ति अनिश्चित काल केलिए लोगों को मिलता हो? अगर वैसी जगह है, तो लोग वहा जरुर जायेन्गे और उससे जरूर वयापार करने की कोशिश करेंगे |

यह सोचने की बात है कि जब शांति को नही बेच सकते है, तब भी लोग शांति के नाम से व्यापर करेन्गे | वे कई माध्यमों से आपको शान्ति का सपना दिखयेंगे और उसको बेचने कि कोशिश जरूर करेनगे! यह दुनियदररि की बात है |

शान्ति को पाने केलिए लोग छुट्टी पर कहा कहा नहीं जाते है? उस्की खोज में वे लन्दन, न्यू यॉर्क, स्विट्ज़रलैंड, कुल्लू मनाली और वैसे बहुत जगह जाते है या जाने की कोशिश करते हैं | वहां कुच्छ दिनों की सुख या आनंद पाने की कोशिश करतें हैं |

क्या वैसे कामों से उनको शान्ति मिलेगी? हाँ, शकून मिलता होगा, मगर शान्ति नहि | वैसे उपायोन से लोग समस्यावों से तातकालिक मुक्ति पा सकते है | मगर यह निस्संदेह है कि उनको शान्ति नहीं बल्कि शान्ति की भ्रान्ति होगि | मै नहीं कहूँगा कि यात्रावों मे नहि जाओ | जरूर जाओ, मगर शान्ति की खोज में नहीं बल्कि सुख पाने, या जिंदगी में कुछ अच्छे समय बिताने |

शान्ति खोजने से या कही जाने से नहीं मिलति है | शान्ति मिलति है जब आप अपने अंदर से शांत होंगें या मन को शानत बनायेंगे |  जब आप शान्त होंगें तब आप को शान्ति मिलेगि | ईसमे कोयि सम्देह नहि है |

अगर आपके अन्दर शांति है, तो आपके बाहर भी शान्ति होगी | इस में जगह का प्रभाव कम, और अपना स्वभाव का प्रभाव ज्यादा |

शान्ति को बाहर नही धुन्दना क्योंकि वह आपके अंदर रहती है, बाहर नहिं | कोशिश करके शांत होजायिये | अपना सहज स्वभाव को जगायिये और उसमे प्रतिष्टित होजायिये | शान्ति पाने केलिये यही सरल और निसचित उपाय है |

तब आप कहि भी हो, जो भी कर रहे हो, किसीसे अर्जुन जैसा युद्ध भी कर रहे हो, आप शान्ति कायम करके रहेंगे और शान्ति को अंदर समाकर रहेन्गे |

शान्ति का यही सत्य है |

शान्ति बहार के वस्तुवों में या स्थानों में नहि मिलेगि | वह कोयि चीज़ नहि है जिसको आप खरीद सकते है |

शांन्ति आपका आदि, अनंत, असली और निजी स्वभाव है | वह आपके गहराईयों छिपा रहता है जिसको विश्व में कोई भी ताकत कभी नष्ट नहीं कर सकता | जब दिन ढलता है और रात जागता है, अपना सर उठा कर ऊपर देखिये | वहा आपको आकाश की हर कोने में शांति ही दिखायि देगि, क्योंकि आकाश भगवान का स्वरूप है जहा दुनिया का सन्नाटा नही पहुंच सकता |

वो आकाश का स्वाभाव आपके अन्दर के आकाश में भी है, जिसको आपने वस्तु विषय की खोज में या अहमकार की भ्रांति में भूल गयें हो | दुनियादारी की चक्कर में आप उस को अपने आप में सवयम दबा भि दिये होंगे या भूल चुके होंगे |

इसीलिए आपको रात को शकून नहीं और दिन में बेचैन से मुक्ति नहीं |

जब अपने मन को आप काबू में लाएंगे और अपने बुद्धी की धारा से अपने मन की प्रक्षालन करोगे, तब शान्ति अपने आप आप मे प्रकट होगी, मुस्कुराएगी, और जीवन की सत्य को आपके मन की ज्ञान में प्रकाशित करेगी |

यही मेरा धरुध विशवास है!

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